महाकुंभ मेले में प्रथम पर्यावरण नागा संत समागम का आयोजन कर चर्चा में आई थी शिप्रा पाठक पर्यावरण दिवस पर संगमनगरी में शिप्रा पाठक के जल संरक्षण के कार्यों की गूंज

महाकुंभ के थाली,थैला एवं पौधों वितरण तथा माघ मेले में अनोखी पर्यावरण पद यात्रा के लिए संगम नगरी में जानी जाने वाली वाटर वूमेन शिप्रा पाठक के कार्यों को पर्यावरण दिवस पर प्रयाग वासियों ने याद किया।आपको बताते चलें आज पर्यावरण दिवस है और आज पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयागराज के लिए कार्य करने वालों की चर्चा की जाए तो सबसे पहले वाटर वूमेन शिप्रा पाठक का नाम आयेगा।महाकुंभ मेले उन्होंने भारत का प्रथम पर्यावरण नागा संत समागम का सफल आयोजन किया वहीं माघ मेले में प्रथम बार संतों के साथ पर्यावरण यात्रा निकालकर अनोखा संदेश दिया।
उत्तर प्रदेश से निकली एक साधारण बेटी ने अपने असाधारण संकल्प से पूरे देश को पर्यावरण संरक्षण का नया मार्ग दिखाया है। “वाटर वुमन” के नाम से विख्यात शिप्रा आज केवल एक नाम नहीं, बल्कि जन-जन को जोड़ने वाला एक व्यापक जनआंदोलन बन चुकी हैं।
पिछले 10 वर्षों में शिप्रा ने 15 हज़ार किलोमीटर की पदयात्राएँ कर प्रकृति के प्रति जागरूकता का जो दीप जलाया, वह आज देशभर में एक विराट ज्योति का रूप ले चुका है। उनकी यात्राओं में नर्मदा की 3600 किलोमीटर परिक्रमा, गोमती की 1008 किलोमीटर यात्रा, अयोध्या से रामेश्वरम तक 3950 किलोमीटर का वन गमन, कैलाश मानसरोवर, मैकल पर्वत और ब्रज चौरासी कोस जैसी अनेक कठिन साधनाएँ शामिल हैं। इन यात्राओं के माध्यम से उन्होंने 15 लाख से अधिक लोगों को अपनी संस्था “पंचतत्व” से जोड़कर पर्यावरण को जनआंदोलन बना दिया है

“पंचतत्व” के माध्यम से अब तक देशभर में 59 लाख पौधे रोपित किए जा चुके हैं—जो केवल आंकड़े नहीं, बल्कि हरियाली की एक जीवंत क्रांति का प्रतीक हैं।
वर्तमान में राजधानी लखनऊ में “बड़े मंगल” के अवसर पर उनका “पत्तल से पौधे” प्रकल्प विशेष चर्चा में है। इस अनूठी पहल के तहत संस्था गोपनीय रूप से भंडारों का निरीक्षण कर रही है और जहाँ कहीं प्लास्टिक या थर्माकोल का उपयोग हो रहा है, वहाँ विनम्र निवेदन के साथ उसे पर्यावरण-अनुकूल पत्तलों से बदला जा रहा है। यह पहल न केवल स्वच्छता बल्कि धार्मिक आयोजनों को भी प्रकृति के अनुरूप बनाने का संदेश दे रही है

इस अभियान का सबसे आकर्षक पक्ष है—108 हनुमान चालीसा से अभिमंत्रित देव वृक्षों का वितरण। सीता अशोक, तुलसी, पाकड़, बरगद, पीपल और नीम जैसे पौधों को लेने के लिए राजधानी में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। श्रद्धा और पर्यावरण का यह अद्भुत संगम लोगों को भावनात्मक रूप से भी जोड़ रहा है।
यह अभियान केवल मंगलवार तक सीमित नहीं है, बल्कि 1 मई से प्रतिदिन निरंतर चल रहा है। अब तक हजरतगंज, सैनिक नगर, विकास नगर, गोखले मार्ग, राजभवन, चन्द्रिका देवी सहित अनेक क्षेत्रों में 93,500 पौधे और 1,95,000 पत्तल वितरित किए जा चुके हैं।
वाटर वुमन शिप्रा का स्पष्ट मानना है कि एक व्यक्ति अकेले एक पौधा लगा सकता है, लेकिन यदि पूरे समाज को इस जल और पर्यावरण आंदोलन से जोड़ा जाए, तो करोड़ों पौधे रोपे जा सकते हैं। यही सोच आज उनके कार्यों में स्पष्ट दिखाई देती है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उनकी संस्था अयोध्या, कानपुर, कन्नौज, प्रयागराज, चित्रकूट, नैमिषारण्य, सुल्तानपुर, रायबरेली, गोरखपुर, अमेठी और वाराणसी से हनुमान चालीसा से अभिमंत्रित पौधे लखनऊ मंगा रही है। यह संकल्प केवल पौधारोपण का नहीं, बल्कि माँ गोमती को स्वच्छ, निर्मल और जीवनदायिनी बनाए रखने का है।
वाटर वुमन शिप्रा की यह पहल सिद्ध करती है कि जब संकल्प मजबूत हो और उद्देश्य पवित्र, तो एक व्यक्ति भी पूरे देश में बदलाव की लहर ला सकता है।

