इलाहाबाद का ऐतिहासिक कदीमी मासूम अली असगर का शाही झूला हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी चांदी की सहज और चांदी के पलने के साथ खुशबूदार फूलों से सज धज कर चक् बहादुरगंज रोजे से 25 जून दिन जुमेरात को अपने कदीमी रास्ते से जियारत करते हुए जनाब गुलाम रसूल के आवाज के बगल में मासूम अली असगर के इमामबाड़े पर जियारत के लिए रखा जाएगा एक मोहर्रम से शुरू होकर ताजिया और मेहंदी का सिलसिला नवी मोहर्रम की शबे आशुरा की रात को झूला चक बहादुरगंज से निकलकर बताशा मंडी गुड़ मंडी लोकनाथ कोतवाली से होते हुए बजाजा पट्टी घंटाघर राईन नगर सब्जी मंडी होता हुआ अपने कदीमी इमामबाड़े गढ़ी सराय पर रखा जाएगा विश्व के इस अनोखे झूले की खासियत यह है कि मासूम अली असगर के झूले के जुलूस में सभी धर्म के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं चक बहादुरगंज से चांदी का चमचमाता हुआ झूला निकलता है जैसे लगता है 6 माह का मासूम अली असगर झूले पर मौजूद हैं यह देखकर शिया समुदाय के लोग अपनी-अपनी अंजुमन के साथ नोहा खानी व मातम करते हुए आगे चलते हैं वही बताशा मंडी लोकनाथ के सनातन धर्म के लोग झूले का स्वागत फूलों से करते हैं और अपने घर के बच्चों को झूला का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं झूला कमेटी के संयोजक श्री गुलाम नबी और अध्यक्ष श्री गुलाम मोहम्मद ने झूले में आए हुए जायरीनों से अपील की है कि प्रशासन की गाइडलाइन का पालन कर प्रशासन का सहयोग करें झूले में गाड़ी घोड़ा लाठी आदि जैसे चीजों को कतई न लाए झूले में कंधा लगाने के लिए अपनी बारी का इंतजार करें और धक्का मुक्की ना करें रात 11:35 पर चक बहादुरगंज से उठ जाएगा

